नेतृत्व
shivrajsinghchauchanमुख्यमंत्री,

श्री शिवराज सिंह चौहान

archanachitnishमंत्री, महिला एवं
बाल विकास विभाग

श्रीमती अर्चना चिटनिस

lalita-yadavराज्य मंत्री, महिला एवं
बाल विकास विभाग

श्रीमती ललिता यादव

PSप्रमुख सचिव, महिला एवं
बाल विकास विभाग

श्री जे.एन.कंसोटिया

Commissionerआयुक्त, महिला एवं
बाल विकास विभाग

ड़ा.अशोक कुमार भार्गव

सामान्य जानकारी

मध्यप्रदेश में 15 अगस्त, 86 को महिला एवं बाल विकास संचालनालय का गठन किया गया तथा महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित समस्त योजनायें आदिम जाति कल्याण विभाग और पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग से इस संचालनालय को हस्तान्तरित की गई। प्रारंभ में यह संचालनालय पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रशासकीय नियंत्रण में रहा तथा वर्ष 1988 में पृथक से महिला एवं बाल विकास विभाग का गठन किया गया। वर्ष 2012 में विभाग अन्तर्गत दो संचालनालय एकीकृत बाल विकास सेवा संचालनलाय एवं महिला सशक्तिकरण संचालनलाय का गठन किया गया।

महिला एवं बाल विकास विभाग के हितग्राही समाज के कमजोर वर्ग, महिलाएं और बच्चे हैं, जिनके विकास व कल्याण का कार्य आसान एवं अल्प अवधि में पूरा होने वाला नहीं है। विभाग की कई योजनाओं का विस्तार हुआ हैं, वहीं लाडली लक्ष्मी योजना,अटल बाल मिशन, समेकित बाल संरक्षण योजना जैसी नई योजनाएं भी संचालित की जा रही है। गतिशील रहते हुए विभाग ने विकास के लिए प्रत्येक चुनौती को स्वीकार किया है। उपलब्धि के आंकड़ें बड़े नहीं है किन्तु समाज में महिलाओं की स्थिति में निरंतर सुधार हुआ है, महिलाओं में अपने अधिकारों व हितों के प्रति जागरुकता आई है, बच्चों के कुपोषण में कमी आई है।

किसी भी देश का विकास मानव विकास के बिना संभव ही नहीं है। विकास की इस नवीन अवधारणा के अनुसार ही आजकल विकास का मूल्यांकन मानव विकास सूचकांकांे के आधार पर किया जाने लगा है। इसी पैमाने को संयुक्त राष्ट्रसंघ, विश्व बंैक जैसी अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने भी अपनाया है।

इन सूचकांकों में शिशु मृत्यु दर, पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर, जन्म के समय जीवन प्रत्याशा (लाईफ एक्सपैक्टेन्सी एट बर्थ), साक्षरता दर और बच्चों का पोषण स्तर प्रमुख हैं। मध्यप्रदेश शासन भी इन कसौटियों पर खरा उतरने के लिए महिलाओं और बच्चों के विकास और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है जो कि प्रदेश की आबादी का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अटल बिहारी वाजपेयी बाल आरोग्य एवं पोषण मिशन, लाड़ली लक्ष्मी योजना, आंगनबाडि़यों में मंगल दिवस कार्यक्रमों का आयोजन आदि इस दिशा में किए जा रहे उल्लेखनीय प्रयास हैं। महिलाओं और बच्चों के विकास के क्षेत्र में प्रदेश शासन द्वारा किए गये प्रयासों को भारत सरकार द्वारा सराहा गया है। साथ ही अन्य राज्यों द्वारा इन प्रयासों को अपनाया भी गया है। इन प्रयासों से ही प्रदेश में भी मानव विकास सूचकांकों में सुधार दर्ज हो रहा है।

महिला एवं बाल विकास विभाग वित्तीय एवं भौतिक आकार में तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। वर्तमान में मध्यप्रदेश के सभी 313 विकासखण्डों तथा 73 शहरी बाल विकास पारियोजनाओ सहित प्रदेश में कुल 453 समेकित बाल विकास परियोजनाएं संचालित हों 453 बाल विकास परियोजनाओं में कुल 84465 आंगनवाड़ी केन्द्र एवं 12670 मिनी आंगनवाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं । इन आंगनवाड़ी केन्द्रों के माध्यम से लगभग 80.00 लाख हितग्राहियों को आई.सी.डी.एस. की सेवाओं से लाभान्वित किया जा रहा है।

आंगनवाड़ी केन्द्र खोलने के मापदण्ड:-

भारत सरकार द्वारा आंगनवाड़ी केन्द्र/मिनी आंगनवाड़ी केन्द्र स्वीकृत करने हेतु जनसंख्या के निम्नानुसार मापदण्ड निर्धारित किये गये है:-

                (अ) आंगनवाड़ी केन्द्र:-

                                1.1          ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र हेतु   :- 400-800 (एक केन्द्र)

                                                                                        :-  800-1600 (दो केन्द्र)

                                                                                        :- 1600- 2400 (तीन केन्द्र)

                                1.2          आदिवासी क्षेत्र हेतु          :- 300-800 (एक केन्द्र)

                (ब) मिनी आंगनवाड़ी केन्द्र:-

                1.1          ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र हेतु   :-150-400 (एक मिनी केन्द्र)

                 1.2         आदिवासी क्षेत्र हेतु         :-150-300 (एक मिनी केन्द्र)

                वर्तमान में प्रदेश में कुल 453 बाल विकास परियोजनायें स्वीकृत हैं तथा बाल विकास परियेाजना का प्रदेश में सर्वव्यापीकरण किया जा चुका है। आंगनवाड़ी केन्द्रों के युक्ति-युक्त करण के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों में भी आंगनवाड़ी केन्द्र प्रतिस्थापित किये गये जहां पर पूर्व से केन्द्र स्वीकृत नहीं थे, जिससे आई.सी.डी.एस. की सेवाओं का अधिकतम हितग्राहियों कों लाभान्व्ति किया गया।