दायित्व निम्नानुसार है:-

  • प्रदेश की महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य व पोषण की स्थिति में सुधार लाना।
  • बच्चों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक विकास के साथ स्वास्थ्य व पोषण की स्थिति में सुधार लाना तथा उन्हें कुपोषण से बचाना।
  • महिलाओं के संवैधानिक हितों को सुरक्षित रखना, महिलाओं के कल्याण, सुरक्षा से संबंधित कानूनों एवं विभिन्न योजनाओं और सामाजिक कुरीतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
  • प्रदेश में विभिन्न विभागों द्वारा महिलाओं व बच्चों के सर्वांगीण विकास से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन में समन्वयक की भूमिका निभाना ताकि योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक पहुंच सके।
  • महिलाओं की स्वायत्तता एवं सशक्तीकरण सुनिश्चित करते हुए उनकी स्थिति में निरन्तर सुधार लाने हेतु विभिन्न विभागों से समन्वय।
  • विषम परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों के समग्र कल्याण एवं पुनर्वास के लिये प्रयास करना।

लोक प्राधिकरण के मुख्य कृत्य

1. समेकित बाल विकास सेवा का संचालन।

2. महिलाओं और बच्चों के लिये शासकीय संस्थाओं का संचालन, अशासकीय संस्थाओं को अनुदान प्रदान करना।

3. महिलाओं के आर्थिक विकास के लिए मध्यप्रदेश महिला वित्त विकास निगम का संचालन।

4. महिलाओं की सामाजिक समस्याओं के लिए राज्य महिला आयोग का संचालन।

उद्देश्य निम्नानुसार है:-

1. प्रदेश की गर्भवती /धात्री महिलाओं तथा 0-6 वर्ष के बच्चों को स्वास्थ्य व पोषण सेवायें प्रदान की जाती है।

2. बच्चों के शारीरिक, मानसिक, बोद्धिक विकास तथा स्वास्थ्य व पोषण की स्थिति में सुधार लाना ।

महिला एवं बाल विकास विभाग का मिशन/विजन:-

मध्यप्रदेश सरकार महिलाओं और बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसी संदर्भ में प्रदेश के मानव विकास प्रतिवेदन में जेन्डर विकास सूचकांक तथा बच्चों के शाला प्रवेश, शिक्षा आदि का समावेश किया जाता है। आजकल विकास की नवीनतम अवधारणा के अनुसार मानव विकास सूचकांक भ्क्प् विकास की गति दर्शाने वाले महत्वपूर्ण मानक हैं और विश्व बैंक तथा संयुक्त राष्ट्र संघ विश्व के देशों की विकासीय स्थिति का मूल्यांकन भी इन्हीं सूचकांक के आधार पर करने लगे हैं। इन सूचकांकों में शिशु मृत्यु दर  पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर,मातृ मृत्यु दर , साक्षरता दर, बच्चों का पोषण स्तर इत्यादि प्रमुख है।

इन सूचकांको के अनुसार हमारे देश भारत और विशेष रूप से मध्यप्रदेश की स्थिति पिछड़े स्थानों के बीच आती थी। इन बातों को देखते हुए भविष्य के नागरिकों के सम्पूर्ण शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक विकास को सुनिश्चित करने के लिये समेकित बाल विकास सेवा योजना की संकल्पना की गई। इस परियोजना को क्रियाविंत करने के साथ-साथ महिला विकास की नई अवधारणा, जिसमें महिला कल्याण से उपर उठकर महिला सशक्तीकरण पर केन्द्रित योजनाओं को लागू करना निहित है, का क्रियान्वयन भी विभाग की जिम्मेदारी में शामिल हुआ है।